डॉ. मोहन भागवत ने समाज में एकता, सांस्कृतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिक आचरण पर जोर दिया।
समरसता का संदेश
उन्होंने कहा कि मत, पंथ और उपासना पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन राष्ट्रहित और सामाजिक सद्भाव सभी को जोड़ते हैं।
युवाओं से सक्रिय भूमिका की अपील
कार्यक्रम में नई पीढ़ी से सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया गया।