नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नई दिल्ली के भारत मंडपम में 45 मिनट तक अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। इस मुलाकात की शुरुआत दोनों नेताओं के गर्मजोशी से गले मिलने के साथ हुई। हालांकि, इस पूरी मुलाकात में जिस बात ने पूरी दुनिया के कूटनीतिक जानकारों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा, वह था दोनों नेताओं का एक ही कार में बैठकर इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन (औद्योगिक प्रदर्शनी) तक पहुंचना।

एक ही कार में सफर के क्या हैं कूटनीतिक मायने?

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में 'प्रोटोकॉल' और 'बॉडी लैंग्वेज' का बहुत महत्व होता है। जब दो बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष अपना-अपना सुरक्षा घेरा और अलग काफिला छोड़कर एक ही कार में सफर करते हैं, तो इसके कई गहरे अर्थ होते हैं:

  • अटूट विश्वास और व्यक्तिगत तालमेल: एक ही कार में साथ सफर करना मोदी और पुतिन के बीच मजबूत व्यक्तिगत केमिस्ट्री और दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे को दर्शाता है।
  • पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश: मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में, जब रूस पर कई तरह के दबाव हैं, तब भारतीय प्रधानमंत्री का रूसी राष्ट्रपति के साथ इतना सहज और आत्मीय दिखना दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है।
  • अनौपचारिक बातचीत का अवसर: बड़े प्रतिनिधिमंडल के बिना सफर करने से दोनों नेताओं को कुछ बेहद संवेदनशील मुद्दों पर सीधे और एकांत में बात करने का अवसर मिलता है।

वैश्विक तनाव और शांति पर भारत का स्पष्ट रुख

इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत-रूस के द्विपक्षीय रिश्तों के साथ-साथ मिडिल ईस्ट और ब्लैक सी में जारी मौजूदा तनाव पर भी गंभीर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी विवाद या संघर्ष का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकाला जाना चाहिए।

सांस्कृतिक कूटनीति और आगामी दौरा

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को प्राचीन तमिल ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' की रूसी भाषा में अनुवादित एक प्रति सप्रेम भेंट की। वार्ता के दौरान पुतिन ने पीएम मोदी को 24वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस आने का न्योता दिया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।