भोपाल। राजधानी भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का 52 घंटे लंबा आंदोलन सरकार के सीधे दखल के बाद अंततः समाप्त हो गया है। लगभग दो महीने से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे इन डॉक्टरों के समर्थन में जूनियर डॉक्टर और सीनियर रेजिडेंट्स के भी उतर आने से हमीदिया अस्पताल की ओपीडी और ऑपरेशन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई थीं।
इस भारी गतिरोध को तोड़ने के लिए उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्वयं जीएमसी (गांधी मेडिकल कॉलेज) पहुंचकर छात्र प्रतिनिधियों से चर्चा की। इस निर्णायक वार्ता के बाद सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा कर दी। अब प्रदेश के इंटर्न डॉक्टरों को 14,337 रुपये की जगह 21,500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे, हालांकि छात्रों की मूल मांग 30 हजार रुपये की थी।
वाटर कैनन विवाद: जांच के आदेश, निचले स्तर पर गिरी गाज
बीते 7 सितंबर के प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों पर वाटर कैनन के इस्तेमाल और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों पर अब प्रशासनिक जांच शुरू हो गई है। गृह विभाग ने आईएएस शिल्पा गुप्ता (सचिव) को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है, जो एक सप्ताह के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। इस मामले में फौरी कार्रवाई के नाम पर एएसआई नरेंद्र सिंह यादव और आरक्षक कृष्ण दत्त शिवहरे को लाइन अटैच कर दिया गया है।
देश दर्पण का विशेष विश्लेषण: पुलिस ने फुटेज के आधार पर एएसआई और आरक्षक पर तो तुरंत कार्रवाई कर दी, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल अनुत्तरित है कि वाटर कैनन चलाने का आदेश आखिर किसने दिया? घटना के समय मौके पर एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान, डीसीपी जोन-3 आयुष गुप्ता समेत कई आला अधिकारी मौजूद थे।
रिपोर्ट: प्रकाश त्रिपाठी, शिवम शुक्ला