उज्जैन दक्षिण की गलियों से निकलकर प्रदेश की बागडोर संभालने वाले डॉ. मोहन यादव ने महज कुछ ही महीनों में 30 लाख करोड़ के निवेश, 'रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव' की अभिनव पहल और महाकाल लोक की तर्ज पर सांस्कृतिक पुनर्जागरण से मध्य प्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बना दिया है।
आस्था और संस्कृति का महा-अभियान: सिंहस्थ 2028 की तैयारी
मई 2028 में उज्जैन में होने वाले 'सिंहस्थ महाकुंभ' को लेकर मुख्यमंत्री स्वयं मॉनिटरिंग कर रहे हैं। क्षिप्रा के शुद्धिकरण, नए घाटों के निर्माण, मालवा क्षेत्र में फोर-लेन और सिक्स-लेन सड़कों का जाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रो प्रोजेक्ट पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है।
30 लाख करोड़ का महा-निवेश: विकास का 'रीजनल मॉडल'
विकास केवल भोपाल या इंदौर तक सीमित न रहे, इसके लिए उन्होंने 'रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव' (RIC) की शुरुआत की, जो उज्जैन से शुरू होकर जबलपुर, रीवा, ग्वालियर और सागर तक पहुंचा है। पारदर्शी नीतियों के चलते प्रदेश में 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्रांति
प्रदेश के सभी 55 जिलों में 'पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है। 'सीएम राइज' स्कूलों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को स्मार्ट क्लासरूम दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री की 'पीएम श्री एयर एंबुलेंस सेवा' ने दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में संजीवनी का काम किया है।
ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण
रीवा, नीमच, आगर और शाजापुर के विशाल सोलर पार्कों से पैदा होने वाली बिजली से न केवल मध्य प्रदेश रोशन हो रहा है, बल्कि दिल्ली मेट्रो तक को बिजली सप्लाई की जा रही है। सांची को देश की पहली 'सोलर सिटी' बनाया गया है।
डॉ. मोहन यादव के सुशासन, उनके सांस्कृतिक बोध और उनके औद्योगिक विजन ने एक ऐसे 'स्वर्णिम मध्य प्रदेश' की नींव रख दी है, जिस पर आने वाली कई पीढ़ियां गर्व करेंगी।
रिपोर्ट: प्रकाश त्रिपाठी, शिवम् शुक्ला