जबलपुर। कटनी के बहुचर्चित जमीन घोटाले, धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग के मामले में फरार चल रहीं निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कराने और दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए नेहा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की शरण ली है। बुधवार को जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ में याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट में हुए तीन बड़े खुलासे

  • रिश्तों पर झूठ का पर्दाफाश: सरकारी वकील ने पुलिसकर्मियों के बयानों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि नेहा पच्चीसिया और सह-आरोपी क्षितिज राज बारापात्रे एक ही घर में पति-पत्नी की तरह रहते थे। इससे पहले जिला अदालत में जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान दोनों ने एक-दूसरे को पहचानने से इनकार किया था।
  • पद का दुरुपयोग: अभियोजन के अनुसार नेहा के अधीन काम करने वाले कांस्टेबल को घर का राशन और घरेलू सामान लाने भेजा जाता था और बिल सह-आरोपी क्षितिज चुकाता था।
  • वकील को ट्रक से कुचलने की साजिश: शिकायतकर्ता के वकील अवनीश तिवारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होकर दावा किया कि पैरवी के कारण उन्हें धमकियां मिल रही हैं और 11 सितंबर को ट्रक से कुचलने की कोशिश की गई।

क्या है 1 करोड़ की जमीन का पूरा खेल?

विवाद कटनी के कुठला थाना क्षेत्र का है। विभागीय जांच में सामने आया कि हत्या के एक आरोपी को फायदा पहुंचाने के लिए समय पर चार्जशीट पेश नहीं की गई, जिससे आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिली। आरोप है कि इसके एवज में कन्हवारा क्षेत्र की करीब 1.07 करोड़ रुपये कीमत की जमीन दबाव बनाकर महज 18.20 लाख रुपये में एजेंट मारूफ अहमद हनफी के नाम लिखवाई गई। जांच में एजेंट मारूफ के खाते में 15 लाख रुपये सह-आरोपी क्षितिज द्वारा ट्रांसफर किए जाने की बात भी सामने आई।

विदेश भागने का डर, लुकआउट सर्कुलर जारी

मामले में नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद पर धोखाधड़ी सहित कई धाराओं में केस दर्ज है। एफआईआर के बाद से तीनों फरार हैं और पुलिस ने प्रत्येक पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि विदेश भागने की आशंका के कारण नेहा के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी है। जबलपुर एएसपी के नेतृत्व में आठ सदस्यीय एसआईटी और साइबर टीम तलाश कर रही है।

आगे क्या?

जिला अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब सबकी नजर हाईकोर्ट के सुरक्षित फैसले पर है। आदेश के बाद ही साफ होगा कि नेहा पच्चीसिया को राहत मिलेगी या जेल जाना होगा।