नई दिल्ली। दुनिया भर के शेयर बाजारों और अर्थव्यवस्थाओं पर मंडराते संकट के बीच सोने में एक ऐतिहासिक उछाल की रूपरेखा तैयार हो रही है। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म ‘जेफरीज’ की रिपोर्ट और शीर्ष अर्थशास्त्रियों के ताजा विश्लेषण ने निवेश जगत में हलचल मचा दी है। अनुमान जताया जा रहा है कि लंबी अवधि में सोना 10,000 डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है।

इस संभावित तेजी का सबसे बड़ा कारण अमेरिका का भारी-भरकम कर्ज और डॉलर की कमजोरी को माना जा रहा है।

डॉलर का गिरता वर्चस्व और अमेरिका का कर्ज

वरिष्ठ अर्थशास्त्री शरद कोहली के अनुसार, अमेरिका इस समय लगभग 40 ट्रिलियन डॉलर के अप्रत्याशित कर्ज तले दबा है। अमेरिकी सरकार के लिए बॉन्ड यील्ड यानी कर्ज पर दिए जाने वाले ब्याज को नियंत्रित करना मुश्किल होता जा रहा है।

जेफरीज के चीफ इक्विटी इन्वेस्टमेंट ऑफिसर क्रिस वुड का मानना है कि यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व बॉन्ड यील्ड को जबरन नीचे लाने की कोशिश करता है, तो बाजार में बड़ी मात्रा में डॉलर की आपूर्ति बढ़ सकती है। डॉलर की आपूर्ति बढ़ने से उसकी कीमत पर दबाव पड़ेगा। अर्थशास्त्र का स्थापित नियम है कि डॉलर जितना कमजोर होता है, सोने की कीमतों में उतनी ही तेजी आने की संभावना बढ़ती है।

केंद्रीय बैंकों की खरीद ने बढ़ाई मांग

बाजार में सोने की मांग बढ़ने का एक बड़ा कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों का आक्रामक रुख भी है। चीन, रूस और ब्रिक्स देश डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव करते हुए फिजिकल गोल्ड खरीद रहे हैं।

इसके साथ रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व के तनाव ने सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग को बढ़ाया है।

चांदी भी लगा सकती है लंबी छलांग

इस तेजी में चांदी भी पीछे नहीं रहने वाली है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि चांदी 150 से 200 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकती है। चांदी की मांग केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहनों, हाई-स्पीड बैटरियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटरों में इसके बढ़ते इस्तेमाल के कारण औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है।

निवेशकों के लिए क्या है सबक?

विशेषज्ञों के अनुसार यह रातों-रात होने वाला बदलाव नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक आर्थिक चक्र की शुरुआत हो सकती है। ऐसे में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करने की सलाह दी गई है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम, समयावधि और विशेषज्ञ सलाह पर ध्यान देना जरूरी है।

एक नजर में प्रमुख कारण

  • ऋण संकट: अमेरिका पर बढ़ता कर्ज और डॉलर के अवमूल्यन की आशंका।
  • केंद्रीय बैंकों की खरीद: डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने की खरीद।
  • भू-राजनीतिक तनाव: युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के कारण सुरक्षित निवेश की मांग।
  • नई तकनीक: एआई, बैटरियों और इलेक्ट्रिक वाहनों से चांदी की औद्योगिक मांग में वृद्धि।