विशेष रिपोर्ट: प्रकाश त्रिपाठी
भोपाल (देश दर्पण संवाद)।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में 7 अगस्त 2026 का दिन एक नया अध्याय लेकर आया। बिना किसी भारी-भरकम स्टारकास्ट और महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर जो सुनामी ला दी है, उसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। फिल्म ने अपनी लागत से सौ गुना से अधिक की कमाई करते हुए 280 करोड़ रुपये से ज्यादा का जादुई कलेक्शन कर लिया है। लेकिन, इस ब्लॉकबस्टर सफलता के बीच जिस एक चेहरे ने दर्शकों और समीक्षकों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, वह है राजधानी भोपाल का 8 वर्षीय नन्हा सितारा—सात्विक शर्मा।

फिल्म में 'शुभंकर' का बेहद अहम किरदार निभाने वाले सात्विक ने अपनी मासूमियत और बेजोड़ अभिनय से बड़े पर्दे पर एक ऐसी छाप छोड़ी है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 'हनुमान अंश' में सात्विक के हिस्से में कई ऐसे मुश्किल और संस्कृतनिष्ठ संवाद आए थे, जिन्हें बोलना अनुभवी कलाकारों के लिए भी चुनौती होता है। मगर 8 साल के इस बाल कलाकार ने कैमरे के सामने जिस आत्मविश्वास के साथ डायलॉग डिलीवरी की, उसने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।

4 साल की उम्र से शुरू हुआ अभिनय का सफर

सात्विक के लिए कैमरे का सामना करना कोई नई बात नहीं है। जब आम बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, तब महज 4 साल की उम्र में सात्विक ने एक्टिंग की दुनिया में कदम रख दिया था। इससे पहले भी वे कई वेब सीरीज और टेलीविजन विज्ञापनों में अपने अभिनय का हुनर दिखा चुके हैं। मगर 'हनुमान अंश' उनके करियर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुई है। सेट पर उनके पेशेवर रवैये और डायलॉग्स याद करने की क्षमता से फिल्म की पूरी यूनिट हैरान थी।

"राम जी और हनुमान जी की कृपा से आसान हुए संवाद"

अपने अनुभव साझा करते हुए सात्विक बड़ी ही मासूमियत से बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें कुछ भारी-भरकम संवाद बोलने में थोड़ी झिझक हो रही थी। लेकिन उन्होंने मन ही मन भगवान राम और हनुमान जी का ध्यान किया, और उनकी कृपा से सारे कठिन डायलॉग आसानी से बोल लिए। उनकी इस बात ने न केवल सेट पर मौजूद लोगों का दिल जीता, बल्कि यह फिल्म की मूल भावना के साथ भी गहराई से जुड़ता है।

राजधानी के लिए गौरव का क्षण

एक तरफ जहां 'हनुमान अंश' भारतीय सिनेमाघरों में लगातार हाउसफुल चल रही है, वहीं भोपालवासियों के लिए यह दोहरी खुशी का मौका है। सात्विक की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि राजधानी की मिट्टी में कला और प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है। पढ़ाई और शूटिंग के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाने वाले सात्विक आज अपने स्कूल और पूरे शहर के लिए एक 'सुपरस्टार' बन चुके हैं।

जिस तरह से सात्विक ने इतनी छोटी सी उम्र में अपनी कला का लोहा मनवाया है, उसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि मध्य प्रदेश का यह नन्हा 'शुभंकर' आने वाले समय में भारतीय सिनेमा का एक चमकता हुआ सितारा बनेगा।