भोपाल। राजधानी के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को मास्टर प्लान का ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है। हालांकि रिहायशी इलाकों में नियम-विरुद्ध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों को राहत नहीं मिली है।

मौजूदा नियमों से तय होगी वैधता

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी संपत्ति या निर्माण की वैधता मौजूदा मास्टर प्लान और लागू भवन निर्माण नियमों के आधार पर तय होगी। नया ड्राफ्ट अंतिम रूप से लागू होने तक सीलिंग और अन्य वैधानिक कार्रवाई प्रभावित नहीं होगी।

लैंड यूज पर स्पष्ट निर्देश

जिन क्षेत्रों का भू-उपयोग स्पष्ट रूप से रिहायशी है, वहां व्यावसायिक गतिविधियों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। जिन इलाकों में मिश्रित भू-उपयोग की स्थिति है, वहां तथ्यों और लागू प्रावधानों की जांच के बाद निर्णय लिया जाएगा।

कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी

राज्य सरकार और नगर निगम को अपनी कार्रवाई का विवरण न्यायालय के सामने प्रस्तुत करना होगा। ड्राफ्ट प्रकाशित किया जा सकेगा, लेकिन अंतिम मंजूरी से पहले अदालत को संबंधित प्रगति से अवगत कराया जाएगा।

लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को शहर के व्यवस्थित विकास, यातायात, आवास और बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।