जी हाँ, अत्यंत आवश्यकता थी, इसी आवश्यकता की पूर्ति हेतु यह समाचार पत्र लाया गया है। लेकिन एक प्रश्न स्वाभाविक रूप से दिमाग में उठता है कि जब देश में पहले से ही इतने सारे समाचार पत्र कार्य कर रहे हैं, तो क्या एक नया समाचार पत्र अपनी प्रासंगिकता सिद्ध कर पाएगा?

आवश्यकता थी भारत की प्राचीन सांस्कृतिक खुशबू से संपूर्ण भारत को महकाने की; यह तथ्य सार्वजनिक करने की कि भारत का इतिहास केवल गुलामी काल का नहीं, बल्कि लगभग 5000 वर्षों से भी अधिक पुरानी गौरवशाली सभ्यता का स्वर्णिम इतिहास है; और यह बतलाने की कि भारत का स्वर्णिम भविष्य यहां से शुरू होकर आने वाले कई हजार वर्ष तक चलेगा।

आवश्यकता थी भारत के युवा वर्ग, महिला वर्ग तथा हर आयु और हर वर्ग के नागरिकों की आवश्यकताओं, आकांक्षाओं और विचारों का न्यायपूर्ण विश्लेषण करने तथा उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देने की। आवश्यकता थी ऐसी पत्रकारिता की, जो पक्ष हो या विपक्ष, सत्ता हो या प्रतिपक्ष — हर राजनीतिक शक्ति का वास्तविक स्वरूप जनता के सामने रखने का साहस रखे, जिसमें न किसी का भय हो, न पक्षपात और न कोई निजी स्वार्थ।

हम संकल्प लेते हैं कि—

  1. हमारा देश दर्पण भारत की प्रगति, विकास यात्रा का ही संवाद करेगा।
  2. हम सत्य को सर्वोच्च स्थान देते हुए पत्रकारिता को भय और स्वार्थ से मुक्त रखने का प्रयास करेंगे।
  3. हम युवा भारत को केंद्र में रखते हुए भारत के स्वर्णिम इतिहास व स्वर्णिम भविष्य को सम्मान के साथ सामने लाएंगे व महिलाओं और समाज के प्रत्येक वर्ग की आवाज़ को स्थान देंगे।
  4. हम राजनीति का विश्लेषण करेंगे, राजनीतिक पक्षधरता नहीं।
  5. हम सनसनी से अधिक सार्थकता को महत्व देंगे।
  6. हम पत्रकारिता को ब्लैकमेलिंग का माध्यम नहीं बनने देंगे।
  7. हम भारत को केवल समस्याओं के देश के रूप में प्रस्तुत नहीं करेंगे, समस्याओं के साथ समाधान की भी बात करेंगे।
  8. हम प्रिंट से डिजिटल तक नई पीढ़ी की पत्रकारिता विकसित करेंगे।

यह वही भारत है जिसकी धरती ने छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप जैसे महान योद्धाओं को जन्म दिया है। हमारी परंपरा हमें सिखाती है कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, उससे आँख मिलाकर खड़ा होना ही सच्चे साहस की पहचान है। मजबूत राष्ट्र का निर्माण केवल प्रतिभाशाली युवाओं से नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र और मजबूत आंतरिक शक्ति वाले युवाओं से होता है।

— असीत पाठक, प्रधान संपादक, देश दर्पण संवाद