भारतीय परंपरा में नारी को परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण की केंद्रीय शक्ति माना गया है। बदलते समय में महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
सम्मान के साथ समान अवसर
महिलाओं की भागीदारी केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है। प्रशासन, विज्ञान, कारोबार, खेल, कला और सामाजिक नेतृत्व में उनकी उपलब्धियां नए भारत की दिशा तय कर रही हैं।
सच्चा सशक्तिकरण तभी संभव है जब सम्मान के साथ निर्णय लेने की स्वतंत्रता और समान अवसर भी उपलब्ध हों।