राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह सात दशकों में पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित किया गया। गुजरात में हुए आयोजन ने भारतीय सिनेमा की विविधता और क्षेत्रीय भागीदारी को नई पहचान दी।

कलाकारों और तकनीशियनों का सम्मान

समारोह में अभिनय, निर्देशन, तकनीकी योगदान और पर्दे के पीछे काम करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। विभिन्न भाषाओं की फिल्मों की मौजूदगी ने भारतीय सिनेमा के व्यापक स्वरूप को सामने रखा।

दिल्ली से बाहर आयोजन को फिल्म संस्कृति के विकेंद्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।