वह भी क्या दौर था, जब सरकारी दफ्तरों में एक कुर्सी या कंप्यूटर खरीदने के लिए टेंडर की मोटी-मोटी फाइलें धूल फांकती थीं। महीनों का इंतजार, बाबूगिरी का बोलबाला और अपारदर्शिता। इसी सुस्त व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए 9 अगस्त 2016 को 'गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस' (GeM) की शुरुआत हुई थी। आज इस पोर्टल ने 10 साल पूरे कर लिए हैं।
आज जेम महज एक 'शॉपिंग वेबसाइट' नहीं, बल्कि एक विशाल डिजिटल इकोसिस्टम बन चुका है। आंकड़े गवाह हैं — इस पर 25 लाख से ज्यादा विक्रेता (सेलर्स) और 1.37 लाख से अधिक सरकारी खरीदार जुड़े हैं। अब तक यहां 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का महा-कारोबार दर्ज हो चुका है।
वर्जन 1.0 की बेसिक सुविधाओं से शुरू हुआ यह सफर आज GeM 3.0 के एडवांस दौर में है। तकनीक इतनी हावी है कि अब इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का भी इस्तेमाल हो रहा है — अगर कुछ ठेकेदार गुट बनाकर (कार्टेल) कीमतें बढ़ाते हैं या सरकार को चूना लगाने की कोशिश करते हैं, तो स्मार्ट सिस्टम तुरंत धांधली पकड़ लेता है।
रिपोर्ट: प्रदीप सैनी